Draupadi Murmu–Mohan Bhagwat: छत्तीसगढ़ में आज दो दिग्गजों का आगमन; संवैधानिक गरिमा और वैचारिक शक्ति का दिखेगा अनूठा संगम…सियासी गलियारों से लेकर बस्तर तक हलचल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में 22 और 23 अक्टूबर को दो प्रमुख हस्तियों के प्रवास को लेकर खास गतिविधियां देखने को मिलेंगी। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत इन दो दिनों में छत्तीसगढ़ में रहेंगे। एक ओर राष्ट्रपति का दौरा संवैधानिक गरिमा, जनजातीय परंपरा और सार्वजनिक कार्यक्रमों से जुड़ा है, तो दूसरी ओर संघ प्रमुख का बिलासपुर प्रवास संगठनात्मक बैठकों और आगामी गतिविधियों पर केंद्रित रहेगा।
दोनों हस्तियों के कार्यक्रम अलग-अलग हैं, लेकिन तारीखों का मेल इस घटनाक्रम को खास बना रहा है। रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर में होने वाले कार्यक्रमों के चलते प्रदेश में प्रशासनिक, सांस्कृतिक और संगठनात्मक गतिविधियां तेज रहेंगी।
राष्ट्रपति मुर्मु का रायपुर से जगदलपुर तक प्रवास
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 22 और 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगी। 22 अक्टूबर को रायपुर स्थित लोक भवन में पूज्य माता हासी देवी के सम्मान में विशेष स्मारक सिक्का जारी करने का कार्यक्रम निर्धारित है। इसके बाद वे रायपुर में आयोजित सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम में शामिल होंगी।
23 अक्टूबर को राष्ट्रपति जगदलपुर पहुंचेंगी। यहां वे बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा से जुड़े मुरिया दरबार में शामिल होंगी और लालबाग मैदान में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगी। राष्ट्रपति के इस प्रवास में बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं को विशेष महत्व मिलेगा।
राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए जगदलपुर में सुरक्षा, यातायात, मंच और आम नागरिकों की सुविधाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं की तैयारियां की जा रही हैं।
बिलासपुर में दो दिन रहेंगे संघ प्रमुख मोहन भागवत
इधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 22 और 23 अक्टूबर को बिलासपुर प्रवास पर रहेंगे। वे कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में संघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करेंगे।
इन बैठकों में संगठन के विस्तार, कार्यकर्ताओं के प्रबोधन, आगामी गतिविधियों और संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा पर चर्चा होगी। क्षेत्र, प्रांत और विभाग स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ संवाद के जरिए संगठन के कामकाज और भविष्य की योजनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
भागवत का यह दौरा संघ की संगठनात्मक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, बैठक में लिए जाने वाले किसी संभावित फैसले को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
दो अलग भूमिकाएं, छत्तीसगढ़ में एक ही समय पर मौजूदगी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की एक ही अवधि में छत्तीसगढ़ में मौजूदगी इस दौरे को विशेष बना रही है। राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में संवैधानिक पद की गरिमा, सार्वजनिक संवाद और बस्तर की सांस्कृतिक परंपरा प्रमुख रहेंगी। वहीं, बिलासपुर में भागवत का प्रवास संगठनात्मक समीक्षा और कार्यकर्ताओं के साथ विचार-विमर्श पर केंद्रित होगा।
एक तरफ रायपुर और जगदलपुर में राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की तैयारियां हैं, तो दूसरी तरफ बिलासपुर में संघ प्रमुख के प्रवास को लेकर संगठन स्तर पर गतिविधियां जारी हैं। इस तरह 22 और 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ में दो प्रमुख हस्तियों के कार्यक्रम एक साथ चर्चा के केंद्र में रहेंगे।
छत्तीसगढ़ के लिए ये दो दिन इसलिए खास हैं कि प्रदेश में एक ओर राष्ट्रपति का संवैधानिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा, तो दूसरी ओर संघ प्रमुख की संगठनात्मक बैठकें। दोनों के दौरे अपने-अपने स्तर पर राज्य की गतिविधियों को राष्ट्रीय चर्चा से जोड़ेंगे।

